हममें से लगभग हर किसी ने कभी न कभी सोचा है कि कुछ लोगों के लिए भविष्यवाणियाँ सच क्यों नहीं होतीं।
इसके कई स्पष्टीकरण दिए जाते हैं। एक विचार यह है कि कुछ लोगों को संभावित घटनाओं के बारे में पहले से नहीं जानना चाहिए, क्योंकि उन्हें जीवन में बिना किसी तय संकेत के अपना रास्ता तय करना होता है। कुछ लोग भीतर से इतने बंद होते हैं कि इस मान्यता के अनुसार, पत्ते उनके भविष्य तक नहीं पहुँच पाते।
स्वतंत्र इच्छा और रास्ते का चुनाव
एक और स्पष्टीकरण यह है कि हम अपना जीवन-पथ स्वयं चुनते हैं। पत्ते आगे बढ़ने के संभावित रास्ते दिखाते हैं: पहले सबसे संभावित भविष्य, फिर दूसरे विकल्प। उदाहरण के लिए, “क्या हम साथ रहेंगे?” जैसे प्रश्न पर वे कई रास्ते और संभावनाएँ, भावनाएँ और एहसास दिखा सकते हैं, साथ ही यह सलाह भी दे सकते हैं कि रिश्ते को बनाए रखने के लिए क्या किया जा सकता है। अगर प्रश्न पूछने वाला उन सुझावों पर ध्यान न दे, तो रिश्ता टूट सकता है। रिश्तों को एक ज्योतिषीय दृष्टि से देखने के लिए हमारी राशियों की प्रेम अनुकूलता मार्गदर्शिका भी पढ़ें।
भविष्यकथन व्यक्ति के मन तक पहुँचने की कोशिश करता है, ताकि वह आज की समस्याओं और आगे आने वाली संभावित कठिनाइयों को समझ सके। यह चेतावनी देता है और बेहतर दिशा दिखाने का प्रयास करता है। फिर भी हम अनजाने में उस राह को छोड़कर दूसरी दिशा चुन सकते हैं। इससे भविष्य बदल जाता है; इसलिए दूर के भविष्य से जुड़ी कुछ भविष्यवाणियाँ सच नहीं होतीं।
प्रश्न पूछने वाले का स्वभाव
एक और स्पष्टीकरण यह है कि दृढ़ निश्चयी, साधन-संपन्न, सहज और जीवन से न डरने वाले लोग अक्सर अपनी नियति की दिशा बदल देते हैं। नतीजतन, भविष्यवाणी का समय आगे-पीछे हो सकता है और जीवन के रास्ते बदल जाते हैं।
इसके उलट, शांत स्वभाव के, व्यवस्थित जीवन जीने वाले लोगों के लिए और उन लोगों के लिए जिन्हें निर्णय लेना कठिन लगता है, भविष्यवाणियाँ आश्चर्यजनक रूप से अक्सर सच हो जाती हैं।
भविष्यवाणी का समय
इसके अलावा, भविष्यवाणी कब सच होगी, यह बताना बहुत कठिन है। कभी-कभी भविष्य के बारे में पूछने पर पत्ते केवल अतीत दिखाते हैं और आगे का रहस्य नहीं खोलते। ऐसा तब हो सकता है जब अतीत के कुछ मामले अभी अधूरे हों या बीती बातें वर्तमान स्थिति को प्रभावित कर रही हों। फिर भी ऐसा पाठ उपयोगी हो सकता है: पूछने वाले को अचानक कई बातें समझ आती हैं और वह वर्तमान को बेहतर बनाने की कोशिश करता है।
कोई भी भविष्यवक्ता अचूक नहीं होता
यह समझना भी जरूरी है कि कोई भी भविष्यवक्ता अचूक नहीं होता। कहा जाता है कि सबसे अच्छे भविष्यवक्ताओं में भी — और ऐसे लोग कम हैं — भविष्यवाणियों के सच होने की दर लगभग 80 प्रतिशत तक पहुँचती है।
भविष्यवाणियों की सटीकता केवल भविष्य बताने वाले पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि हम किस तरह के इंसान हैं। कुछ लोगों से पत्ते बस “कुछ कहना नहीं चाहते।” इसका अर्थ यह नहीं कि कुछ बुरा होने वाला है; शायद हम भीतर से इतने खुले नहीं हैं कि पत्ते हमारे सामने भविष्य का थोड़ा-सा पर्दा उठा सकें।
पहला प्रकाशन (मूल पोलिश संस्करण): 7 दिसंबर 2009। यह लेख हमारी संपादकीय टीम से जुड़े ज्योतिषियों और गूढ़ विद्या के विशेषज्ञों ने लिखा है; HOROSCOP.SPACE के लिए इसका संपादन और अनुवाद किया गया है। © सर्वाधिकार सुरक्षित।
