सदियों से लोग चंद्रमा के रहस्यों को समझने और यह जानने की कोशिश करते रहे हैं कि उसका पृथ्वी और मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। प्राचीन संस्कृतियों के लिए चाँदी जैसा यह खगोलीय पिंड रहस्यमय था—रात में दिखाई देने वाला, बदलता हुआ और प्रकृति पर स्पष्ट असर डालता हुआ, जैसे समुद्र में ज्वार-भाटा। इसलिए यह जादुई परंपराओं के प्रमुख संकेतों में शामिल हुआ।
जादुई परंपराओं में सफेद, धूसर और काले जादू का वर्गीकरण भी मिलता है: सफेद, धूसर और काला जादू: क्रॉली और क्रेग की परिभाषाएँ।
प्राचीन सभ्यताओं की चंद्र देवियाँ
लगभग हर प्राचीन सभ्यता चंद्रमा और उससे जुड़ी देवियों की पूजा करती थी। प्राचीन मिस्र में चंद्रमा का संबंध आइसिस से, यूनान में आर्टेमिस, हेकेटे, इओ, मेने और सेलीने से जोड़ा जाता था; रोमन लोग लूना और डायना का सम्मान करते थे। कुछ संस्कृतियों में चंद्रमा और उसके देवताओं को खास महत्त्व मिला, क्योंकि उसका स्वभाव रात और रहस्य से जुड़ा था।
इस पूजा की छाप कैलेंडर में भी बची है। रोमनों ने सप्ताह का एक दिन चंद्रमा को समर्पित किया—सोमवार, जिसे लैटिन में dies Lunae कहा गया। इस नाम की गूँज आज भी कई भाषाओं में सुनाई देती है, जैसे अंग्रेज़ी Monday, यानी “चंद्रमा का दिन”, और फ़्रेंच lundi।
चंद्रमा का जादू क्या है?
प्रकृति पर प्रभाव के अलावा, चंद्रमा एक और क्षेत्र—जादू—में अहम भूमिका निभाता है। अनुष्ठान करने वालों को इस खगोलीय पिंड के गुण और उसके चरणों का मंत्रों से संबंध समझना चाहिए।
जादुई परंपरा में चंद्रमा का संबंध जल तत्व से है। चंद्र जादू का उपयोग मुख्यतः अंतर्ज्ञान और परामनोवैज्ञानिक क्षमताओं के विकास, शुद्धि और प्रेम से जुड़े मामलों में किया जाता है। इससे दूसरे अनुष्ठानों और अपनी ऊर्जा को भी बल देने की बात कही जाती है। चंद्र चक्र समझने से उन अनुष्ठानों का समय चुना जा सकता है जिनका उद्देश्य जीवन में किसी चीज़ को बढ़ाना या घटाना हो।
जादुई अभ्यास में चंद्र कलाएँ
बढ़ता चंद्रमा (पहला चरण)
यह नए काम शुरू करने का समय है। इस चरण में प्रेम, सौंदर्य, प्रतिभा या धन से जुड़ी किसी चीज़ को बढ़ाने, मजबूत करने या बेहतर करने के अनुष्ठान किए जाते हैं।
पूर्णिमा
पूर्णिमा को सबसे अधिक शक्ति का समय माना जाता है। इसे कठिन और महत्त्वपूर्ण अनुष्ठानों के लिए सबसे उपयुक्त समय समझा जाता है।
घटता चंद्रमा (तीसरा चरण)
यह त्याग या दूर करने वाले मंत्रों का समय है—ऐसे अनुष्ठान जिनका उद्देश्य किसी चीज़ को कम करना या हटाना हो। इस चरण में बुरी आदतें छोड़ने, परेशानियों से मुक्त होने और जो अब काम का नहीं उसे समाप्त करने पर ध्यान दिया जाता है।
अमावस्या
अमावस्या के समय परंपरा आराम करने, अपने भीतर ध्यान लगाने और चंद्र जादू न करने की सलाह देती है। यह नए चक्र की शुरुआत से पहले शांति का समय है।
शुरुआत कैसे करें?
सबसे आसान पहला कदम है आकाश को देखना और चंद्र कलाओं का कैलेंडर रखना। हर चरण के दौरान अपने इरादे और मनोदशा लिखने से समझना आसान हो सकता है कि नई शुरुआत का समय कब है और कब व्यवस्था करके किसी चीज़ को छोड़ देना चाहिए।
पहला प्रकाशन (मूल पोलिश संस्करण): 15 फ़रवरी 2012। यह लेख हमारी संपादकीय टीम से जुड़े ज्योतिषियों और गूढ़ विद्या के विशेषज्ञों ने लिखा है; HOROSCOP.SPACE के लिए इसका संपादन और अनुवाद किया गया है। © सर्वाधिकार सुरक्षित।
